Wednesday, 25 October 2023

3 मार्च मंगलवार खग्रास (ग्रस्तोदय) चन्द्रग्रहण भारत में दृश्य

  

भारत में  दिखाई  देने वाला यह ग्रहण 

🌕 खग्रास (ग्रस्तोदय) चन्द्रग्रहण

📅 3 मार्च 2026, मंगलवार

(फाल्गुनी पूर्णिमा)


3 मार्च 2026 को सम्पूर्ण भारत में खग्रास चन्द्रग्रहण ग्रस्तोदय रूप में दिखाई देगा। अर्थात जब भारत में चन्द्रोदय होगा, उससे पहले ही ग्रहण प्रारम्भ हो चुका होगा। इसलिए भारत के अधिकांश भागों में ग्रहण का प्रारम्भ, खग्रास प्रारम्भ एवं ग्रहण-मध्य (परमग्रास) दिखाई नहीं देगा।


🔸 विशेष जानकारी:

भारत के केवल सुदूर पूर्वी राज्यों —

(उत्तर-पूर्वी बंगाल क्षेत्र, नागालैंड, मिजोरम, असम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश आदि) —

में खग्रास समाप्ति एवं ग्रहण समाप्ति देखी जा सकेगी।

शेष भारत में चन्द्रोदय के समय तक खग्रास समाप्त हो चुका होगा और केवल ग्रहण की समाप्ति (मोक्ष) ही दिखाई देगी

ग्रहण-सूतक-इस ग्रहण का सूतक 3 मार्च, 2026 ई. को प्रातः 6घं.-20मिं. (भा.स्टैं.टा.) से ही प्रारम्भ हो जाएगा। शुद्ध (ग्रहण-मोक्ष) चन्द्र-बिम्ब के दर्शन एवं तर्पण करने के बाद ही सभी धार्मिक कार्य करने चाहिए।

ग्रहण का समय (भारतीय मानक समय अनुसार)

• स्पर्श प्रारम्भ — 15:20

• खग्रास प्रारम्भ — 16:34

• ग्रहण मध्य — 17:04

• खग्रास समाप्ति — 17:33

• ग्रहण समाप्ति (मोक्ष) — 18:47

🌘 चन्द्र मालिन्य (Penumbra) प्रारम्भ — 14:14

🌕 चन्द्र कान्ति निर्मल (Penumbra समाप्त) — 19:53

🕉 पर्वकाल — 3 घं. 27 मिनट

🌑 खग्रासकाल — 59 मिनट



📌 भारत में इस ग्रहण का आरम्भ स्थानीय चन्द्रोदय से माना जाएगा, क्योंकि यहाँ मुख्यतः ग्रहण की समाप्ति ही दृष्टिगोचर होगी।


यह खग्रास चन्द्रग्रहण फाल्गुनी पूर्णिमा के दिन विशेष आध्यात्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व रखता है।

ग्रहण का राशिफल तथा ग्रहण-पूजन क्या करें — क्या न करें?

ग्रहण के सूतक एवं ग्रहण के समय में स्नान, जप, पाठ, मंत्र एवं स्तोत्र-पाठ, दान-पुण्य आदि करना कल्याणकारी होता है। धार्मिक/आस्थावान लोगों को 3 मार्च, सूर्यास्त से पूर्व अपनी-अपनी परम्परानुसार स्नान करके संकल्प कर लेना चाहिए तथा ग्रहण-मोक्ष (18 वें-47 मि.) के बाद अथवा अगले दिन 4 मार्च, 2026 ई. को प्रातः सूर्योदय के समय पुनः स्नान करके संकल्पपूर्वक योग्य ब्राह्मण को दान देना चाहिए।

सूतक एवं ग्रहणकाल में गृहप्रवेश, विवाह, मुंडन, नामकरण आदि शुभ कार्य नहीं करने चाहिए। सूतककाल में बाल, वृद्ध, रोगी एवं गर्भवती को यथाशक्ति भोजन या दवा आदि लेने में कोई दोष नहीं।

यहाँ दी गई छवि का स्पष्ट पाठ प्रस्तुत है —



ग्रहण का राशियों पर असर


मेष — खर्च अधिक, भागदौड़ अधिक

वृष — कार्य सिद्धि, धन लाभ

मिथुन — प्रगति, उत्साह एवं पुरुषार्थ वृद्धि

कर्क — धन हानि, खर्च अधिक, यात्रा

सिंह — शरीर कष्ट, चोरभय, धन-क्षय

कन्या — धन हानि, परेशानी

तुला — धन एवं सुख लाभ

वृश्चिक — रोग-कष्ट, चिन्ता-भय, संघर्ष

धनु — सन्तान सम्बन्धी चिन्ता

मकर — शत्रु व दुर्घटना भय, खर्च अधिक

कुम्भ — स्त्री/पति सम्बन्धी कष्ट

मीन — रोग, गुप्त चिन्ता, कार्य-विलम्ब

ग्रहणकाल में पहले से रखी हुई वस्तुओं पर कुश/तुलसी आदि रखने से वे दूषित नहीं होतीं। सूखे खाद्य पदार्थ में कुश डालने की आवश्यकता नहीं।

ग्रहण का लोक-भविष्य एवं प्रभाव

(i) ग्रहण का मास-फल — यह चन्द्रग्रहण फाल्गुन मास में घटित होने से जनजीवन, गान-वादन, नृत्य-संगीत से जुड़े व्यक्तियों, श्रेष्ठ विद्वानों, क्षत्रियों तथा तपस्या करने वालों को पीड़ा एवं कष्ट दे सकता है।

(ii) ग्रहण का वार-फल — ग्रहण मंगलवार को होने से युद्ध, अग्नि, रोग, शस्त्रादि से कष्ट, चोरी-डकैती, हिंसा आदि की वृद्धि हो सकती है।

(iii) ग्रहण का राशि/नक्षत्र फल — यह चन्द्रग्रहण पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र एवं सिंह राशि में घटित हो रहा है। अतः सिंह राशि एवं इस नक्षत्र से संबंधित व्यक्तियों को विशेष कष्टकारी प्रभाव सम्भव है।


👉 इस महत्वपूर्ण खगोलीय घटना की जानकारी अपने मित्रों एवं परिवारजनों के साथ अवश्य साझा करें।



ग्रहण  काल और बाद में क्या करें?


 जब ग्रहण प्रारंभ हो तो स्नान जप मध्यकाल में होम देव पूजा और ग्रहण का मोक्ष समीप होने पर दान तथा पूर्ण मोक्ष होने पर स्नान करना चाहिए।

                स्पर्शे स्नानं जपं कुर्यान्मध्ये होमो सुराचर्नम्।मुच्यमाने सदा दानं विमुक्तौ स्नानमाचरेत्।।


  ग्रहण  काल में सूर्य की पूजा करने के लिए सूर्य की शुरुआत में सूर्य अष्टक का पाठ  होना सूर्य स्त्रोत का  पाठ होना चाहिए।

ग्रहण काल में क्या सावधानियां रखें*

 पका हुआ अन्न,कटी हुई सब्जी, ग्रहण काल में दूषित हो जाते हैं उन्हें नहीं रखना चाहिए परंतु तेल घी दूध दही लस्सी मक्खन पनीर अचार चटनी रब्बा आदि में तिल या कुछ कुशा रख देने से ग्रहण काल में दूषित नहीं होते सूखे खाद्य पदार्थों में डालने की आवश्यकता नहीं।

 ध्यान रहे ग्रहण को नंगी आंखों से कदापि नहीं देखे वेल्डिंग वाले काले गिलास में से देख सकते हैं ग्रहण के समय तक ग्रहण की समाप्ति पर गर्म पानी से स्नान करना निषिद्ध है रोगी गर्भवती स्त्रियां बालकों के लिए निश्चित नहीं है काल में सोना खाना-पीना तेल मदन मित्र पुरुषोत्तम निषिद्ध है नाखून भी नहीं काटने चाहिए।

  • *ग्रहणकाल में प्रकृति में कई तरह की अशुद्ध और हानिकारक किरणों का प्रभाव रहता है। इसलिए कई ऐसे कार्य हैं जिन्हें ग्रहण काल के दौरान नहीं किया जाता है।                                      
  • *ग्रहणकाल में सोना नहीं चाहिए। वृद्ध, रोगी, बच्चे और गर्भवती स्त्रियां जरूरत के अनुसार सो सकती हैं। 
  • *ग्रहणकाल में अन्न, जल ग्रहण नहीं करना चाहिए।
  • *ग्रहणकाल में यात्रा नहीं करना चाहिए, दुर्घटनाएं होने की आशंका रहती है।
  • *ग्रहणकाल में स्नान न करें। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान करें।
  • *ग्रहण को खुली आंखों से न देखें।
  • *ग्रहणकाल के दौरान महामृत्युंजय मत्र का जाप करते रहना चाहिए।

 *गर्भवती स्त्रियां क्या करें*

ग्रहण का सबसे अधिक असर गर्भवती स्त्रियों पर होता है। ग्रहण काल के दौरान गर्भवती स्त्रियां घर से बाहर न निकलें। बाहर निकलना जरूरी हो तो गर्भ पर चंदन और तुलसी के पत्तों का लेप कर लें। इससे ग्रहण का प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर नहीं होगा। ग्रहण काल के दौरान यदि खाना जरूरी हो तो सिर्फ खानपान की उन्हीं वस्तुओं का उपयोग करें जिनमें सूतक लगने से पहले तुलसी पत्र या कुशा डला हो। गर्भवती स्त्रियां ग्रहण के दौरान चाकू, छुरी, ब्लेड, कैंची जैसी काटने की किसी भी वस्तु का प्रयोग न करें। इससे गर्भ में पल रहे बच्चे के अंगों पर बुरा असर पड़ता है। सुई से सिलाई भी न करें। माना जाता है इससे बच्चे के कोई अंग जुड़ सकते हैं। 

      ग्रहण काल के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के मंत्र ओम नमो भगवते वासुदेवाय या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करती रहें।


यह ग्रहण अश्वनी नक्षत्र तथा मेष राशि  में होगा आते इस राशि नक्षत्र में उत्पन्न लोगों के लिए विशेष अशुभ है अतः इस राशि वालों को ग्रहण ग्रहण दान तथा आदित्य स्त्रोत सूर्य अष्टक स्त्रोत का पाठ करना चाहिए। सूर्य का जप दान चन्द्र दान करें।

 ग्रहण का राशियों पर असर

  • मेष राशि - दुर्घटना शरीर कष्ट शत्रुता 
  • वृषराशि-  धन हानि 
  •  मिथुन -  धन लाभ हानि चिन्ता 
  • कर्क -रोग कष्ट
  • सिंह- सन्तान संम्बन्धित चिंता 
  •  कन्या-  शत्रु भय खर्च 
  • तूला- स्त्री/ पति परेशानी
  •  वृश्चिक राशि  रोग गुप्त चिन्ता 
  • धनु- खर्च अधिक कार्य बिल्म्ब 
  •  मकर-  कार्य लाभ 
  • कुंभ- धन लाभ 
  •  मीन - धन हानि व्यर्थ यात्रा 


सभी से मेरा विनम्र  अनुरोध रहेगा कि आप सभी इस विषय में अधिक से अधिक लोगों को अवगत कराएं ताकि जनमानस को इसके नुकसान से बचाया जा सके।तथा ग्रहण की खतरनाक किरणों से गर्भावस्था में पल रहे शिशु के लिए अच्छी नहीं होती ताकि गर्भावस्था में शिशु को कोई भी विकार ना आ पाए है तथा शीशु के शरीर में किसी प्रकार की विकृति ना आए हमरा उद्देश्य है कि सभी लोग स्वस्थ और निरोग रहे।

#सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः 

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ।।



3 comments:

  1. Jai shree radhe

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  2. ॐ नमः भगवते वासुदेवाय नमः

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