Wednesday, 18 March 2026

इस बर्ष में कैसी रहेगी वारिश फल तथा व्यापार कैसा रहेगा राजा गुरु तथा मंत्री मंगल का फल

  


इस बार ‘रौद्र’ नामक संवत्सर रहेगा।जब भी कोई बर्ष में शुभ कार्य होगा रौद्र नामक संवत्सर का प्रयोग किया जाएगा इस सम्बतसर का प्रयोग होगा। इस वक्त सृष्टि के संम्वत् अनुसार 19558 85127 (१९५५९९५१२७) यहसृष्टि का बर्ष चला हुआ है सृष्टि को इतना समय हो गया है तथा विक्रम संवत 2083 चला हुआ है शक संवत 1948-49 (१९४८)होगा और कलियुग का समय अभी 5126(५१२६) वर्ष बीत चुका है तथा कलियुग वर्तमान 5127 (५१२७) बर्ष चल रहा है। जबकि कलियुग की कुल अवधि 432000 (४३२०००) बर्ष है।कृष्ण संवत 5262(५२६२) चला है ।श्री बुद्ध संवत 2649 (२६४९)महावीर जैन संवत 2551(२५५१) और हिजरी सन 1447 (१४४७)अंग्रेजी का2026(२०२६) खालसा का 327 (३२७) सृष्टि के अनुसार सतयुग का प्रमाण 1728000(१७२८०००) बर्ष तथा त्रेतायुग 1296000(१२९६०००)बर्ष द्वापर युग प्रमाण 864000(८६४०००) बर्ष कलयुग का प्रमाण 432000 (४३२०००)वर्ष का होता है।


(१) वि. संवत् २०८३ में संवत्सर एवं राजा-मन्त्री-आदि का फल 

ईस संवत के अनुसार वि.संवत् 2083 का आरम्भ 19 मार्च 2026 को होगा। इस वर्ष का संवत्सर “रौद्र” माना गया है। ज्योतिष ग्रन्थों के अनुसार इस संवत्सर में राजनीतिक, सामाजिक और प्राकृतिक घटनाओं में कुछ विशेष परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं।

🔹 ‘रौद्र’ नामक नव-संवत्सर का फल (वि.सं. 2083)

नव विक्रम संवत 2083 का आरम्भ 19 मार्च 2026 (गुरुवार) को होगा।
इस वर्ष का नाम ‘रौद्र’ है। शास्त्रों के अनुसार इस वर्ष कुछ स्थानों पर वर्षा सामान्य से अधिक तथा कहीं-कहीं कम होने की संभावना रहती है। कृषि-कार्य में उतार-चढ़ाव, राजनीतिक हलचल तथा सामाजिक परिवर्तन के संकेत मिलते हैं।

राजनीतिक दृष्टि से शासन-व्यवस्था में कुछ कठोर निर्णय लिए जा सकते हैं। जनता के हित में कई नई योजनाएँ प्रारम्भ हो सकती हैं, किन्तु आर्थिक क्षेत्र में अस्थिरता भी देखी जा सकती है।

🔹 कृषि एवं वर्षा का फल

यदि वर्षा समय पर और संतुलित हुई तो कृषि उत्पादन अच्छा रहेगा।
कहीं-कहीं अधिक वर्षा के कारण बाढ़ की स्थिति भी बन सकती है। किसानों को सावधानी से खेती करने की आवश्यकता रहेगी।

🔹 समाज पर प्रभाव

समाज में नई तकनीकों और विचारों का प्रसार होगा। शिक्षा, विज्ञान और संचार के क्षेत्र में प्रगति होगी। किन्तु कुछ स्थानों पर सामाजिक तनाव भी देखने को मिल सकता है।

🔹 स्वास्थ्य

वि. संवत् 2083 के देश-पदाधिकारियों का फल
(1) वर्ष (वि. संवत् 2083) के राजा ‘गुरु’ का फल

“गुरौ नृपे वर्षति कामदं जलं महीतले कामदुधाश्च धेनवः।

यज्ञक्रिया विप्र बहुश्रोत्रिणो महोत्सवाः सर्वजनाः व्रते स्थिताः॥”


अर्थात् संवत् का राजा ‘गुरु’ (बृहस्पति) हो तो उस वर्ष कृषि-फसलों के लिए पर्याप्त वर्षा होती है। गाय-भैंस आदि चौपायों से पर्याप्त मात्रा में दूध प्राप्त होता है। ब्राह्मण तथा धर्मपरायण लोग यज्ञ, होम आदि शुभ कार्यों में संलग्न रहते हैं। समाज में धार्मिक उत्सवों की वृद्धि होती है।


व्यापार के लिए भी अनुकूल वातावरण रहता है। नए-नए उद्योगों का विकास होता है। कृषि उत्पादन तथा फलों की पैदावार अच्छी होती है। देश में शांति तथा समृद्धि का वातावरण बना रहता है।


(2) संवत् के मन्त्री ‘मंगल’ का फल


“अवनीशो नृ मन्त्रित्वां गतो भवति दस्युभयादिवेदनाः।

जनपदेषु ज्वरः सुखं संक्षिप्तं न वर्धते पुण्यकर्म च॥”


अर्थात् संवत् का मन्त्री ‘मंगल’ होने से उस वर्ष देश में जनता चोरों, लुटेरों आदि से भयभीत रह सकती है। रोगों का प्रकोप भी बढ़ सकता है। कुछ स्थानों पर अशांति तथा दुर्घटनाओं की घटनाएँ बढ़ने की संभावना रहती है।

(3) सस्येश ‘गुरु’ का फल


“कर्पटि सुशासन पुरोहित सकल साधकाः श्रुतिपाठकाः।

जलवृष्टि जलदा धान्यसमृद्धि धनसमृद्धिः॥”


अर्थात् गुरु (बृहस्पति) सस्येश होने पर वेद-शास्त्रानुसार धर्म-कर्म का पालन बढ़ता है। लोगों को सुख-शांति और कल्याण की प्राप्ति होती है। वर्षा पर्याप्त होती है तथा गेहूँ, धान आदि की पैदावार अच्छी होती है। कृषि और व्यापार करने वाले लोगों को अच्छा लाभ मिलता है।


(4) धान्येश ‘बुध’ का फल


“बहुसस्ययुक्ता पृथ्वी रसश्च वर्धते।

नीतियुक्ताः सदा भूपा बुधे धान्याधिके सति॥”


अर्थात् जिस वर्ष धान्यपति ‘बुध’ हो, उस वर्ष अच्छी वर्षा के कारण धान्य का उत्पादन पर्याप्त होता है। रसदार पदार्थों (दूध, घी, गुड़, तेल आदि) की प्रचुरता रहती है। शासन-तंत्र जनकल्याणकारी नीतियाँ बनाता है।


(5) मेषेश (वर्ष का स्वामी) ‘चन्द्र’ का फल


“शशिनि तोयदये यदि गोमहिषादयः क्षीरदुग्धा ददति।

फलवती धान्यसमृद्धि विविध भोगवती नृभूमिः॥”


अर्थात् वर्ष का स्वामी ‘चन्द्र’ होने पर गाय-भैंस आदि पशुओं से दूध की अधिक प्राप्ति होती है। गेहूँ, धान, चावल आदि की फसल अच्छी होती है। फलों-फूलों की पैदावार बढ़ती है और पृथ्वी विविध प्रकार के सुख-साधनों से सम्पन्न होती है।


(6) रसेश ‘शनि’ का फल


“रविस्ते रसेषु संसक्ताः न जलदा गदवश्च पयोदाः।

अजपावो राजपशवः खरोष्ट्रा जनपदेषु नरा न रंस्यन्ति॥”


अर्थात् ‘शनि’ रसेश होने पर कुछ स्थानों पर कठिनाइयाँ आ सकती हैं। पशुधन तथा जनजीवन पर मिश्रित प्रभाव देखने को मिलता है। लोगों को परिश्रम अधिक करना पड़ता है।


(7) नीरसेश (धान्येश के सहायक) ‘गुरु’ का फल


“शस्यवृद्धिर्भवेद् वर्षे धान्यं च बहुधा भवेत्।

नैतिकता च प्रजा मध्ये सुखं सर्वत्र वर्धते॥”


अर्थात् वर्ष में गुरु के प्रभाव से धान्य और फसलों की वृद्धि होती है। प्रजा में नैतिकता बढ़ती है तथा समाज में सुख-शांति का वातावरण रहता है।


(8) फलादेश ‘बुध’ का फल


“यदि बुधः फलदो भवेत् फलवन्तो वनस्पतयः।

वाणिज्ये वृद्धिमाप्नोति जनपदो हर्षमाप्नुयात्॥”


अर्थात् जब बुध फलादेश का कारक हो, तब वृक्षों में फल-फूल अधिक लगते हैं। व्यापार में वृद्धि होती है और जनपद में समृद्धि आती है।


(9) दुर्गेश ‘गुरु’ का फल


“दुर्गाणि च गुरु: पालयति नृपं धर्मेण संस्थितम्।

प्रजाः सुखेन वसन्ति च सर्वत्र विजयः भवेत्॥”


अर्थात् गुरु दुर्गेश होने पर राजा धर्म के अनुसार शासन करता है। राज्य में शांति रहती है और प्रजा सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करती है।


(10) दुर्गेश (सेनापति) ‘बुध’ का फल


“अर्थं च दुर्भिक्षनिवारणाय यत्नः।

पुरुषार्थवृद्धिः प्रजासुखं च॥”


अर्थात् बुध सेनापति होने पर शासन व्यवस्था प्रजा की समस्याओं को दूर करने का प्रयास करती है। आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होती है और जनसाधारण को लाभ मिलता है।


वर्षेश विचार


आनन्दादि संवत्सरों में ‘रौद्र’ नामक वर्ष का उल्लेख मिलता है। इस वर्ष में सामान्यतः कुछ क्षेत्रों में वर्षा अधिक तथा कुछ स्थानों पर कम होने की संभावना रहती है। फलस्वरूप कृषि उत्पादन में स्थान-स्थान पर भिन्नता दिखाई देती है।


नवमेश का फल


“रोगाणां विकलता बहुला भवेत्।

स्थानभ्रंशः कालान्तरालाद् यत्र नैव वर्षा जलं ददाति॥”


अर्थात् कुछ स्थानों पर रोगों की वृद्धि, वर्षा की कमी या असामान्य मौसम के कारण लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।


दशमेश ‘राहु’ का फल


“तस्करभयमिदं नित्यं राजभयं च प्रजासु च।

राजकार्यमसिद्धिः स्यात् सर्वकार्येषु मन्दता॥”


अर्थात् राहु के प्रभाव से कुछ स्थानों पर चोरी-डकैती या प्रशासनिक कठिनाइयों की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।मैंने आपकी तस्वीर में जो पाठ दिखाई दे रहा है उसे जैसा है वैसा टाइप कर दिया है ताकि आप इसे आसानी से कॉपी कर सकें।


(7) नीरसेश (धानुओं के स्वामी) ‘गुरु’ का फल


“हरित पीतवस्त्राणि पीतवस्त्रादिकं च यत्।

नीरसेशो यदा जीवः सर्वेषां प्रीतिरस्ति॥”


अर्थात् नीरसेश अर्थात् धातु पदार्थों का स्वामी गुरु (बृहस्पति) होने से हल्दी, पीले वस्त्र, पीतल, सोना आदि पीले वर्ण की वस्तुओं की माँग बढ़ती है। इन वस्तुओं के मूल्य में वृद्धि होती है तथा लोगों की रुचि भी इनकी ओर अधिक रहती है।


(8) फलाधिप ‘चन्द्र’ का फल


“यदि चन्द्रः फलदः स्यात् फलवता वर्तते क्षितिः।

विज्ञानयुक्ता वसुधा नृपतयो न्यायपालनतत्पराः॥”


अर्थात् फलों का स्वामी चन्द्रमा होने पर पृथ्वी पर फलों की प्रचुरता रहती है। राजा प्रजा को न्याय और सुशासन प्रदान करने का प्रयास करते हैं। विभिन्न प्रकार के फल, फूल और वनस्पतियाँ अच्छी होती हैं।



(9) धनाधिप ‘गुरु’ का फल


“धनस्य च गुरु: द्विजवृद्धिपो वणिजां वर्धनः सुखदायकः।

फलति पुष्पित भूमिः सदा विविध द्रव्ययुक्ता भवेत्॥”


अर्थात् धन का स्वामी गुरु होने से व्यापारियों के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनती हैं। व्यापार और धन-संपत्ति में वृद्धि होती है। भूमि पर फसलें अच्छी होती हैं और लोगों को विविध प्रकार के संसाधनों की प्राप्ति होती है।


(10) दुर्गेश (सेनापति) ‘चन्द्र’ का फल


“अथ च दुर्गपतिश्चन्द्रः नृपवतां सुदृढं सुखिनः शुभशासनात्।

वृद्ध्यन्ते दुर्गाणि गोसंपदः नृपत्वं नरवीर्यपराक्रमाः॥”


अर्थात् यदि सेना का स्वामी चन्द्रमा हो तो राज्य में सुशासन और व्यवस्था बनी रहती है। वीरता और पराक्रम में वृद्धि होती है। गौ-सम्पदा और अन्य संसाधनों में वृद्धि होती है।


चतुर्थ फल विचार


आनन्दादि संवत्सरों में ‘पुष्कर’ नामक मेघ का भी उल्लेख मिलता है।


फल – “विविधपातकवृद्धिः”

अर्थात् समय-समय पर चोरी, कपट आदि पापकर्मों की वृद्धि हो सकती है। विभिन्न प्रकार के रोगों के कारण लोगों को कष्ट भी हो सकता है।


नवमेघ में ‘काल’ नामक मेघ का फल


“रोगतो विकलता व्युष्मता स्थानेषु कालहता।

कालानामजलदैर्वा यदा नैव वर्षति जलं बहु॥”

अर्थात् ‘काल’ नामक मेघ होने पर लोगों को रोग और कष्ट अधिक हो सकते हैं। वर्षा सामान्य से कम हो सकती है जिससे जनजीवन प्रभावित होता है।

द्वादश नागों में ‘तक्षक’ नामक नाग का फल




Monday, 1 September 2025

भारत में दिखाई देने वाला खग्रास चंद्र ग्रहण: जानिए संपूर्ण जानकारी, समय और सूतक काल

*आ रहा है साल का सबसे बड़ा खग्रास चंद्र ग्रहण: जानिए संपूर्ण जानकारी, समय और सूतक काल**



आकाश में होने वाली खगोलीय घटनाओं का हमारे जीवन और संस्कृति पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण घटना है चंद्र ग्रहण। जल्द ही, 7 और 8 सितंबर 2025 को, हम एक **खग्रास चंद्र ग्रहण** (Total Lunar Eclipse) के साक्षी बनेंगे। यह ग्रहण न केवल एक अद्भुत खगोलीय दृश्य होगा, बल्कि इसका धार्मिक महत्व भी बहुत अधिक है।


आइए, इस आगामी चंद्र ग्रहण के बारे में सब कुछ विस्तार से जानें।


#### **चंद्र ग्रहण क्या होता है?**


जब हमारी पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, तो पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इस स्थिति को **चंद्र ग्रहण** कहा जाता है। यह खगोलीय घटना हमेशा पूर्णिमा के दिन ही होती है। हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण को एक महत्वपूर्ण धार्मिक घटना माना जाता है और इस दौरान कई विशेष नियमों और अनुष्ठानों का पालन किया जाता है।



#### **7-8 सितंबर 2025 चंद्र ग्रहण का विस्तृत समय**


इस ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 28 मिनट की होगी। नीचे ग्रहण के हर चरण का समय दिया गया है:


*   **उपच्छाया से पहला स्पर्श:** 08:59 पी एम (7 सितंबर)

*   **खण्डग्रास (आंशिक) ग्रहण प्रारम्भ:** 09:58 पी एम (7 सितंबर)

*   **खग्रास (पूर्ण) ग्रहण प्रारम्भ:** 11:01 पी एम (7 सितंबर)

*   **परमग्रास चंद्र ग्रहण (अधिकतम ग्रहण):** 11:42 पी एम (7 सितंबर)

*   **खग्रास समाप्त:** 12:22 ए एम (8 सितंबर)

*   **खण्डग्रास समाप्त:** 01:26 ए एम (8 सितंबर)

*   **उपच्छाया से अन्तिम स्पर्श:** 02:24 ए एम (8 सितंबर)


**ग्रहण की कुल अवधियाँ:**

*   **खग्रास की अवधि:** 01 घण्टा 21 मिनट्स 27 सेकण्ड्स

*   **खण्डग्रास की अवधि:** 03 घण्टे 28 मिनट्स 02 सेकण्ड्स

*   **उपच्छाया की अवधि:** 05 घण्टे 24 मिनट्स 37 सेकण्ड्स


#### **सूतक काल का समय और नियम**


हिंदू धर्म में ग्रहण से पहले की एक निश्चित अवधि को सूतक माना जाता है। यह एक अशुभ समय होता है, जो ग्रहण शुरू होने से कुछ घंटे पहले आरंभ होता है और ग्रहण समाप्त होने पर खत्म होता है।


*   **सूतक प्रारम्भ:** 12:19 पी एम (दोपहर), 7 सितंबर 2025

*   **सूतक समाप्त:** 01:26 ए एम (देर रात), 8 सितंबर 2025


**बच्चों, वृद्धों और अस्वस्थ लोगों के लिए सूतक:**

*   **प्रारम्भ:** 06:36 पी एम (शाम), 7 सितंबर 2025

*   **समाप्त:** 01:26 ए एम (देर रात), 8 सितंबर 2025


सूतक काल के दौरान भोजन करना, पकाना, सोना और मनोरंजन जैसे कार्य वर्जित होते हैं। इस दौरान मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं और गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।


# **चंद्र ग्रहण और इसका धार्मिक महत्व**


हिंदू धर्म में केवल उन्हीं चंद्र ग्रहणों का धार्मिक महत्व होता है, जिन्हें नंगी आँखों से देखा जा सकता है, यानी **प्रच्छाया वाले चंद्र ग्रहण**। उपच्छाया वाले ग्रहण दिखाई नहीं देते, इसलिए पंचांग में उनका धार्मिक महत्व नहीं होता और उनसे जुड़े कोई कर्मकांड नहीं किए जाते।



यह भी महत्वपूर्ण है कि ग्रहण से संबंधित कर्मकांड तभी किए जाते हैं जब ग्रहण आपके शहर में दिखाई दे रहा हो। हालांकि, यदि खराब मौसम के कारण ग्रहण दिखाई न दे, तब भी सूतक के नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है।



Friday, 8 August 2025

जाने कब मनाए रक्षा बंधन समय




इस साल रक्षाबंधन कब हैराखी बांधने का सही समय क्या है


इस बार 9 तारीखशनिवार को , पूर्णिमा का दिनरक्षाबंधनबांधने का समय सुबह 7:30 से 9:09 बजे तक अति शुभ रहेगा।


Thursday, 24 July 2025

जाने कैसा रहेगा आप की नाम राशी के मुताबिक दिसम्बर मास 2025 का भविष्य


जाने कैसा रहेगा आप की नाम राशी के मुताबिक दिसम्बर     मास 2025 का भविष्य


1. *मेष राशि* (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ) - ता. 7 से मंगल भाग्य-स्थान में तथा गुरु की पुनः दृष्टि के कारण बिगड़े कार्यों में सुधार तथा स्वास्थ्य में बेहतर होगा। धर्म-कर्म में रुचि तथा शुभ कार्य पर खर्च होगा।


2. *वृष राशि* (ई, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो) - मासारम्भ में शुक्र स्वगृही दृष्टि से खर्च व कर्ज के बावजूद निर्विघ्न आय के साधन बनते रहेंगे। ता. 20 से शुक्र अष्टमस्थ होने पर परिवार में विवाद, तनाव व _पितृ-दोष_ का भय। स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें।


3. *मिथुन राशि* (क, की, कु, घ, ङ, छ, के, को, ह) - विशेष परिश्रम एवं पारिवारिक सहयोग के बावजूद कार्य-सिद्धि में विलम्ब होगा। परन्तु ता. 15 से सूर्य पंचमस्थ होने से विघ्नों के बावजूद कुछ बिगड़े कार्यों में सुधार होगा। मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि परन्तु क्रोध अधिक रहे।


4. *कर्क राशि* (हि, हु, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो) - ता. 15 से शुक्र गृहस्थ-भाव में निविघ्न आय व शुभ-लाभ देता रहेगा। ता. 18 से गुरु उच्च स्थिति में होकर उन्नति व विवाह-योग बनाता है।


5. *सिंह राशि* (म, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे) - पूर्वार्द्ध भाग में धन-लाभ व उन्नति के अवसर मिलेंगे परन्तु थकावट, मानसिक तनाव और स्वभाव में क्रोध की भावना अधिक रहेगी। ता. 15 के बाद परिवार में विवादास्पद कार्य कम होंगे परन्तु स्त्री तथा संतान-सम्बन्धी कुछ परेशानियाँ रहेंगी।


6. *कन्या राशि* (टो, पा, पी, पू, ण, ठ, पे, पो) - शनि की ढैया समाप्त करने का प्रयत्न लाभकारी रहेगा। ता. 7 के बाद गुरुदृष्टि होने से बने कार्यों में विघ्न, शत्रु व आर्थिक परेशानियाँ बढ़ेंगी। मन अशान्त एवं असमर्थ रहेगा।


7. *तुला राशि* (रा, री, रू, रे, रो, ता, ति, तु, ते) - आय में वृद्धि के साथ-साथ खर्च भी अपेक्षाकृत रहेगा। माता-पिता तथा धर्म-कर्म में शुभ मंगल कार्य भी सम्भव होंगे। ता. 20 से शुक्र भाग्येश होकर द्वितीय भाव में आकर सङ्कल्प एवं सम्मान बढ़ायेगा।


8. *वृश्चिक राशि* (तो, न, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू) - दिसम्बर-मासारम्भ में किसी नवीन कार्य को कार्यरूप देने का प्रयास लाभकारी रहेगा। ता. 7 से मंगल द्वितीयस्थहोने से बनते कामों में विघ्नघरेलु  आर्थिक परेशानियां बढ़ेंगी। मन अशान्त एवं असन्तुष्ट रहेगा।


9. *धनु राशि* (ये, यो, भा, भी, भू, धा, फ, ढे) - शनि-दृष्टि से व्यय-वृद्धि, स्वास्थ्य-गिरावट व मानसिक दबाव। गुरु का शुभ प्रभाव स्त्री-सुख एवं शुभ समाचार देगा, पर ऋण-दबाव भी बना रहेगा।


10. *मकर राशि* (भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी) - बुध अस्तव्यस्त रहने से स्वास्थ्य का बिगड़ना संभव। गुरु दृष्टि से ऋण या लेन-देनों में धोखे की सम्भावना; धैर्य रखें।


11*कुम्भ राशि* (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सौ, दा) - पूर्वार्द्ध भाग में धन-लाभ व उन्नति के अवसर मिलेंगे परन्तु थकावट, मानसिक तनाव और स्वभाव में क्रोध की भावना अधिक रहेगी। ता. 15 के बाद परिवार में विवादास्पद कार्य कम होंगे परन्तु स्त्री तथा संतान-सम्बन्धी कुछ परेशानियाँ रहेंगी।


12*मीन राशि* (दि, दु, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची) - मासारम्भ में गुरु की दृष्टि से भाग्योदय, धन-लाभ व शुभ समाचार मिलेंगे। ता. 7 से सूर्य के साथ बुध का योग होने से कार्य-व्यवसाय में प्रगति होगी। मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी और पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा।

जाने कैसा रहेगा आप की नाम राशी के मुताबिक नवंम्मबर मास 2025 का भविष्य

जाने कैसा रहेगा आप की नाम राशी के मुताबिक नवम्बर     मास 2025 का भविष्य


1. *मेष राशि* (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ) - मंगल अस्त-व्यस्त रहने से स्वास्थ्य-कष्ट, घरेलू उलझनें तथा बनते कामों में अड़चन रहेगी। धन का अपव्यय, लाभ में कमी एवं पुत्र-चिन्ताएँ रहेंगी।


2. *वृष राशि* (ई, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो) - ता. 2 से शुक्र पुनः स्वराशिगत होने पर परिस्थितियों में सुधार के योग। धीरे-धीरे आर्थिक क्षेत्र में परिवर्तन एवं लाभ संभावना। मंगल-दृष्टि से योजनाएँ पूर्ण करने में विलम्ब सम्भव; कार्य _कौशल_ दिखाएँ।


3. *मिथुन राशि* (क, की, कु, घ, ङ, छ, के, को, ह) - मासारम्भ में शुभ ग्रह षष्ठस्थ होने से व्यावसायिक क्षेत्रों में दौड़-धूप अधिक एवं नये सम्पर्क जीवित रहेंगे। जमीन-जायदाद सम्बन्धी समस्याएँ उत्पन्न होंगी। ता. 9 से फिर भाग्येश रहेंगे।


4. *कर्क राशि* (हि, हु, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो) - शनि की ढैया के बावजूद शुक्र अनुकूल; व्यवसाय-नौकरी में स्थिरता व आय बढ़ेगी। स्वास्थ्य सामान्य पर दायित्व अधिक; पारिवारिक समझौता लाभदायक।


5. *सिंह राशि* (म, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे) - सूर्य नीचराशिगत एवं केतु संचार के कारण धन-लाभ साधारण हो, मानसिक तनाव एवं क्रोध अधिक रहे। परिवार में अकारण ही विरोधाभास और तनाव उत्पन्न हो। उत्तरार्द्ध में व्यर्थ यात्रा से परेशानी होगी।


6. *कन्या राशि* (टो, पा, पी, पू, ण, ठ, पे, पो) - परिवार, भूमि-जायदाद सम्बन्धी धर्म-कर्म में रुचि रहेगी। बिगड़े कार्य बनेंगे। निविघ्न आय के साधन बने रहेंगे।


7. *तुला राशि* (रा, री, रू, रे, रो, ता, ति, तु, ते) - ता. 2 से शुक्र स्वराशिगत (तुला) रहने से परिस्थितियाँ कुछ सम्हलेंगी; धन-लाभ के अच्छे अवसर मिलेंगे। सम्पत्ति, भूमि-मकान सम्बन्धी कार्यों में प्रगति के योग।


8. *वृश्चिक राशि* (तो, न, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू) - मासारम्भ में शुभ ग्रह लाभ-स्थान में होने से कार्य-क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण सम्पर्क बढ़ेंगे व नई योजनाएँ बनेंगी। पूर्व प्रयासों का लाभ कुछ दिन बाद मिलेगा।


9. *धनु राशि* (ये, यो, भा, भी, भू, धा, फ, ढे) - राशि-स्वामी गुरु की उच्च स्थिति से धन-लाभ व व्यवसाय-उन्नति के योग, परन्तु असन्तोष के कारण प्रतिष्ठा में विघ्न-बाधाएँ; शत्रु प्रबल रहेंगे।


10. *मकर राशि* (भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी) - गुरु की उच्च दृष्टि से विवेक जाग्रत होगा; निर्णय उचित होंगे। शत्रु-पक्ष निरस्त होगा और मानसिक शान्ति मिलेगी। धन-लाभ होगा; परिवार व परिजन से स्नेह तथा सहयोग प्राप्त होगा।


11. *कुम्भ राशि* (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सौ, दा) - मासारम्भ से मंगल की दृष्टि रहने से श्रम अधिक, बनते कार्यों में चिन्ता तथा मानसिक तनाव एवं घरेलू उलझनें रहेंगी। अचानक शुक्र सम्बन्धी शुभ समाचार मिल सकता है।


12. *मीन राशि* (दि, दु, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची) - गुरु-परी तिथि में उपचार बने रहने से आर्थिक जीवन में अनेक प्रगति के साधन बढ़ेंगे और सन्तान-पक्ष में अवसर प्राप्त होगा। स्वास्थ्य-स्थिति भी उपयुक्त रहेगी

जाने कैसा रहेगा आप की नामराशी के मुताबिक अक्टुबर मास 2025 का भविष्य

 यहाँ अक्टूबर के लिए विभिन्न राशियों के फलादेश दिए गए हैं:


जाने कैसा रहेगा आप की नाम राशी के मुताबिक अक्टुबर    मास 2025 का भविष्य


1. *मेष राशि* (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ) - नवीन परिस्थितियों के बावजूद धन-लाभ सामान्य रहे, भागदौड़ व परिश्रम अधिक रहेगा। वर्तमान परिस्थितियों में अचानक परिवर्तन आ सकता है। भूमि-वाहनों के क्रय-विक्रय द्वारा उत्पन्न आकस्मिक क्रोध, उत्तेजना एवं व्यर्थ की भागदौड़ लगी रहेगी।


2. *वृष राशि* (ई, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो) - ता. 9 को शुक्र पंचमस्थ नीचराशिगत होने पर मानसिक तनाव व शिक्षा-सम्बन्धी अड़चनें। कुछ आर्थिक परेशानियाँ व निकट-बन्धुओं से तकरार रहेंगी; पूर्व प्रयासों का लाभ कुछ दिन बाद मिलेगा।


3. *मिथुन राशि* (क, की, कु, घ, ङ, छ, के, को, ह) - ता. 8 से शुभ द्वितीय-भाव में मंगल के साथ संचार करने से निष्ठित प्रभाव होगा। शुभ-ग्रह का ह्रास; आय के साधन बने रहेंगे। सन्तान व उनके करियर-सम्बन्धी चिन्ता रहेगी।


4. *कर्क राशि* (हि, हु, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो) - ता. 17 से गुरु-ग्रह की वृद्धि-दृष्टि से धन-लाभ व शुभ समाचार। परिवार-सुख व शिक्षा-क्षेत्र में प्रगति, पर अनावश्यक खर्च से बचें।


5. *सिंह राशि* (म, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे) - कुछ सोची योजनाओं में आंशिक सफलता मिले, धन-लाभ सामान्य रहे। घर-परिवार में शुभ मंगल कार्य भी होंगे। ता. 17 से वृथा भ्रमण एवं खर्च बढ़ेगा। वाहनादि का ऋण-विक्रय भी होगा।


6. *कन्या राशि* (टो, पा, पी, पू, ण, ठ, पे, पो) - अक्टूबर में कोई विशेष उल्लेख नहीं है।


7. *तुला राशि* (रा, री, रू, रे, रो, ता, ति, तु, ते) - नौकरी में रुकावट तथा व्यवसाय में खर्च बने रहने से स्वास्थ्य-सम्बन्धी परेशानियाँ। ता. 9 को शुक्र इन्द्रासन (तीन) एवं अन्य ग्रहों के योग से धन-लाभ के संकेत, परन्तु मानसिक तनाव रहेगा।


8. *वृश्चिक राशि* (तो, न, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू) - इस माह बुध इस राशि में संचार तथा गुरु की दृष्टि के प्रभाववश धर्म-कर्म में रुचि बढ़ेगी। बिगड़े कार्य बनेंगे। निविघ्न आय के साधन बने रहेंगे। मान-सम्मान, प्रतिष्ठा, स्वारी और सुख के साधन में वृद्धि होगी।


9. *धनु राशि* (ये, यो, भा, भी, भू, धा, फ, ढे) - ढैया के कारण तनाव, पारिवारिक उलझन व बन्धुओं से मनभेद। आर्थिक उचाटता व उदासीनता रहेगी। ता. 8 के बाद वाहन-सुख, वस्त्र-सुख व स्वास्थ्य में कुछ सुधार।


10. *मकर राशि* (भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी) - आशाओं से सफलता; ऐश्वर्य व मान-सम्मान में वृद्धि होगी। सौन्दर्य व रुचि के काम लाभ देंगे। पर गुरु नीच दृष्टि से आलस्य और आत्मसन्तोष बढ़ाकर हानि भी देगा। खर्च में वृद्धि, चोट-चपेट अथवा मानसिक परेशानी के योग।


11. *कुम्भ राशि* (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सौ, दा) - धन-लाभ सम्भावना बढ़ेगी। स्वास्थ्य सम्बन्धी चिन्ता रहेगी तथा आँखों से मन परेशान होगा। ता. 18 से शुभ ग्रह शनि-स[…] के कारण नये कार्यों की योजना में परिवर्तन का विचार बढ़ेगा।


12. *मीन राशि* (दि, दु, थ, झ, ञ, दे, दो

जाने कैसा रहेगा आप की नाम राशी के मुताबिक सितम्बर मास 2025 का भविष्य


जाने कैसा रहेगा आप की नाम राशी के मुताबिक सितम्बर   मास 2025 का भविष्य


1. *मेष राशि* - (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)

सितम्बर— विभिन्न आर्थिक योजनाओं को क्रियान्वित करने के संकेत हैं, परन्तु कुछ भ्रामक धारणाओं के कारण भ्रम एवं स्वग्ति दृष्टि रहने से कुछ किये हुए कार्य की पूर्ति होगी। किन्तु स्वास्थ्य- परेशानियाँ एवं वाहनों के रख-रखाव में धन-व्यय हो सकता है।


2. *वृष राशि* - (ई, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)

सितम्बर—शुक्र तृतीय भाव में होने से *दौड़-धूप व तनाव* अधिक। परिवार में मनभेद व असान्ति; अचानक दूरस्थ यात्रा के योग। ता. 14 से शुक्र चतुर्थ भाव में केतु-युक्त होने पर परिस्थितियाँ बदलेंगी।


3. *मिथुन राशि* - (क, की, कु, घ, ङ, छ, के, को, ह)

सितम्बर—पिता-वर्गीय भाव में उच्चवास रहने से मान-सम्मान एवं प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। आय-व्यय बढ़ने से कार्य-क्षेत्र व व्यवसाय में सम्बन्ध अधिक होगा। ता. 8 से स्व-राशिगत (कन्या) होने से परिस्थितियों में धीरे-धीरे सुधार होगा।


4. *कर्क राशि* - (हि, हु, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)

सितम्बर— ता. 14 तक शुक्र-संचार से व्यवसाय/नौकरी की स्थिति मध्यम। ता. 15 से शुक्र स्वराशिगत होने पर विवाह-योग तथा आय-वृद्धि के संकेत। स्वास्थ्य में सुधार, पर दौड़-धूप अधिक।


5. *सिंह राशि* - (म, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)

सितम्बर—सूर्य द्वितीय भाव (कन्या) में होने से कुछ बड़े कार्यों में घुसपैठ तथा आय-साधनों में वृद्धि के योग हैं। किसी नवीन कार्य-क्षेत्र में धन निवेश की योजना बनेगी और आय के साधनों में वृद्धि के साथ-साथ खर्च अधिक होगा।


6. *कन्या राशि* - (टो, पा, पी, पू, ण, ठ, पे, पो)

सितम्बर— बुध लाभ-स्थान में होने से कार्य-क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण सम्पर्क बढ़ेंगे व नई योजनाएँ बनेंगी, पर गृह-जीवन में असंत, परन्तु निकट-सम्बन्धी बन्धुओं से तकरार रहेंगी; पूर्व प्रयासों का लाभ कुछ दिन बाद मिलेगा।


7. *तुला राशि* - (रा, री, रू, रे, रो, ता, ति, तु, ते)

सितम्बर—मन अशान्त एवं असन्तुष्ट रहेगा। स्वास्थ्य में विकार, माता-पिता से मनमुटाव तथा नौकरी/व्यवसाय में परिवर्तन का विचार बनेगा। ता. 14 से शुक्र लाभ-स्थान में होने के कारण नये कार्यों में कुछ सुधार एवं धन-लाभ के अवसर दिखेंगे।


8. *वृश्चिक राशि* - (तो, न, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)

सितम्बर—राशिस्वामी बुध इस राशि में संचार होने से बने कर्मों में चिन्ता तथा उतार-चढ़ाव अधिक दिखाई देगा । आय-दौड़-धूप अधिक रहने से आर्थिक स्थिति दुविधापूर्ण रहेगी । 13 सितम्बर को 12वें घर के विभिन्न ग्रह-योगों से व्यर्थ खर्च और मान-सम्मान घटे रहेंगे ।


9. *धनु राशि* - (ये, यो, भा, भी, भू, धा, फ, ढे)

सितम्बर—सूर्य-गुरु-शनि की संयुक्त दृष्टि से परिस्थितियाँ *उलट-पुलट* रहेंगी। नौकरी/व्यवसाय में बाधाएँ होते हुए भी धन-लाभ व उन्नति के अवसर मिलेंगे। लम्बी यात्राएँ, धन का अपव्यय, ऋण तथा मानसिक उलझन बनी रहेगी।


10*मकर राशि* - (भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी)

सितम्बर—अन्त्य भाव में सूर्य-बुध रहने से पारिवारिक सदस्यों के स्वास्थ्य व परेशानियों का डर रहेगा। व्यवसाय में खर्चीली प्रवृत्तियाँ उभरेंगी तथा पारिवारिक माहौल में तनाव रह सकता है। गुरु की दृष्टि रहने से पति-पत्नी रिश्तों में मधुरता अवश्य बढ़ेगी।


11*कुम्भ राशि* - (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सौ, दा)

सितम्बर— इस राशि पर गुरु शुभ है किन्तु सूर्य का अशुभ फल अधिक रहेगा। उन्नति व धनागम के अवसर मिलेंगे; किन्तु व्यय व तनाव भी बढ़ेगा। वैवाहिक / पारिवारिक सम्बन्ध में सुधार होगा। परिवार में सहयोग व सामंजस्य रहेगा।


12*मीन राशि* - (दि, दु, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)

सितम्बर— अल्पधन परिश्रम करने पर भी लाभ के अवसरों का समुचित लाभ नहीं उठा पाऊँ। सन्तान के सम्बन्ध में चिन्ता और घरेलू उलझनों के कारण मन उदासीन रहेगा। ता. 16 के बाद आय कम और खर्च अधिक, पारिवारिक मतभेद एवं कार्य-स्थिति सामान्य हो सकेगी।

जाने कैसा रहेगा आप की नाम राशी के मुताबिक अगस्त मास 2025 का भविष्य

जाने कैसा रहेगा आप की नाम राशी के मुताबिक अगस्त   मास 2025 का भविष्य

1. *मेष राशि (Aries)* - (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)

क्रोध एवं उत्तेजना से कोई बना-हुआ कार्य बिगड़ने के योग हैं। आर्थिक उलझनें पैदा होंगी। संयमशील व्यवहार से गत किये गये प्रयासों में सफलता मिलेगी। स्वास्थ्य-सम्बन्धी एवं वाद-विवाद में परेशानी होगी।


2. *वृष राशि (Taurus)* - (ई, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)

व्यर्थ की भागदौड़ एवं निकटवर्तियों से खिन्नता रहेगी। ता. 20 से शुक्र तृतीय भाव में होने से खर्च और बढ़ेगा। व्यवसाय/नौकरी की स्थिति मध्यम।


3. *मिथुन राशि (Gemini)* - (क, की, कु, घ, ङ, छ, के, को, ह)

व्यर्थ की भागदौड़ एवं तनाव अधिक। परिवार में मनभेद व असान्ति; अचानक दूरस्थ यात्रा के योग।


4. *कर्क राशि (Cancer)* - (हि, हु, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)

शत्रु-बन्धुओं से मनमुटाव, शारीरिक कमजोरी व मानसिक तनाव रह सकता है। विवादों से दूरी बनाएँ; ऋण-शत्रु मामलों में विजय सम्भव।


5. *सिंह राशि (Leo)* - (म, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)

सूर्य अस्त (कर्क) होने से आर्थिक दबाव तथा विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। स्वास्थ्य, तनाव एवं पारिवारिक उलझनों में वृद्धि होगी।


6. *कन्या राशि (Virgo)* - (टो, पा, पी, पू, ण, ठ, पे, पो)

मंगल इस राशि पर तथा बुध लाभ-स्थान में होने से कार्य-क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण सम्पर्क बढ़ेंगे व नई योजनाएँ बनेंगी, पर गृह-जीवन में असंतोष रहेगा। मासान्त में आर्थिक उलझनें, खर्च अधिक एवं मानसिक असन्तुष्टि बनी रहेगी।


7. *तुला राशि (Libra)* - (रा, री, रू, रे, रो, ता, ति, तु, ते)

व्यर्थ की भागदौड़ एवं निकटवर्तियों से खिन्नता रहेगी। ता. 20 को शुक्र राशिस्थ होने से आजीविका में वृद्धि होगी। पर एकत्र कार्य अटकेंगे; शत्रु-बन्धुओं से व्यर्थ का झंझट, दौड़-धूप एवं खर्च अधिक रहेगा।


8. *वृश्चिक राशि (Scorpio)* - (तो, न, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)

परिस्थिति धीरे-धीरे अनुकूलताएँ होंगी। परस्पर और परिजनों से कुछ झंझट का भय रहेगा। अपने कार्य-सम्बन्धी योजनाओं में परिवर्तन करने पर लाभ प्राप्त होगा।


9. *धनु राशि (Sagittarius)* - (ये, यो, भा, भी, भू, धा, फ, ढे)

मानसिकता से ही स्थिति शिथिल रहेगी। ता. 16 से मातापक्ष की दृष्टि तथा स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान रखें। अनावश्यक खर्च व धन-लाभ में विघ्न की सम्भावना होगी।


10. *मकर राशि (Capricorn)* - (भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी)

शनि प्रतिग्रहण होने से अब तक किये गये प्रयत्नों में लाभ व उन्नति के अवसर मिलेंगे। शत्रु-पक्ष सक्रिय रहेगा, धन-व्यय अधिक; फिर भी आर्थिक स्रोत उभरेंगे।


11. *कुम्भ राशि (Aquarius)* - (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सौ, दा)

मान्यताओं में विशेष सफलता प्राप्त होगी। शनि द्वितीयस्थ होने से धन-लाभ व उन्नति के कुछ अवसर मिलेंगे। नवीन कार्य को आरम्भ देने का प्रयत्न लाभकारी रहेगा।


12. *मीन राशि (Pisces)* - (दि, दु, थ, झ, ञ, दे,

Sunday, 20 July 2025

जाने कैसा रहेगा आप की नाम राशी के मुताबिक जुलाई मास 2025 का भविष्य


जाने कैसा रहेगा आप की राशी के मुताबिक जुलाई  मास 2025 का भविष्य

 मेष राशि (Aries) — (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)


- मासांत में मंगल पंचम भाव में; मंगल-शनि समसप्तक।

- नये विचार व योजनाएँ, पर असमंजस से लाभ में विलम्ब।

- 28 जुलाई के बाद बिगड़े कार्य सुधरेंगे।

- फिर भी मंगल-शनि दृष्टि से ख़र्च अधिक।


वृष राशि (Taurus) — (ई, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)


- शुक्र स्वराशिगत रहने से प्रारम्भ किये कार्यों में कुछ सफलता, धन-लाभ व उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे।

- पर शनि-दृष्टि से दुर्घटना या चोट की आशंका; ता. 26 तक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान रखें।


मिथुन राशि (Gemini) — (क, की, कु, घ, ङ, छ, के, को, ह)


- शुक्र इस भाव में स्थित होने से मनोरंजन एवं विलासात्मक कार्यों पर धन का खर्च ज़्यादा।

- परिवार में असमंजस रहेगा, परन्तु बने कार्यों में विघ्न-बाधाएँ, स्वास्थ्य कुछ ढुलमुल।

- प्रेम-सम्बन्ध यथावत।

- ता. 18 से शुभ ग्रह अस्त होने से शुक्र-वक्र के कार्यों में परेशानी-योग है।


कर्क राशि (Cancer) — (हि, हु, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)


- परिस्थितियों में कुछ सुधार तथा किसी नवीन कार्य पर खर्च या योजना प्रारम्भ हो सकती है।

- ता. 16 से शत्रु-दृष्टि रहने से खर्च व आर्थिक परेशानियाँ बनेंगी।

- मानसिक तनाव से बचें, स्वास्थ्य का ध्यान रखें।


सिंह राशि (Leo) — (म, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)


- मासारम्भ में ग्रह अनुकूल; कार्य-व्यस्तताएँ रहेंगी।

- प्रतिष्ठित कार्यों में प्रगति से मन उत्साहित रहेगा।

- किन्तु स्वास्थ्य ढीला हो सकता है।

- प्रियजनों से विवाद से बचें, संयम रखें।


कन्या राशि (Virgo) — (टो, पा, पी, पू, ण, ठ, पे, पो)


- बुध चतुर्थ भाव में होने से नौकरी में पदोन्नति कुछ रुकावटों के बाद सम्भव।

- व्यवसाय में आय कम; किये प्रयत्न सफल होंगे।

- श्रेष्ठ व्यक्तियों से सम्पर्क लाभप्रद।


तुला राशि (Libra) — (रा, री, रू, रे, रो, ता, ति, तु, ते)


- मासारम्भ से शुक्र अष्टमस्थ रहने से व्यवसाय में आंशिक लाभ एवं विलासिता हेतु व्यय अधिक।

- मानसिक तनाव, स्वास्थ्य-हानि एवं ऋण-चिन्ता रहेगी।

- घरेलू उलझनें बढ़ेंगी।

- उपाय—ता. 16 से ‘श्रीराम महातन्त्र’ का पाठ करें।


वृश्चिक राशि (Scorpio) — (तो, न, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)


- मंगल अस्त-स्थ होने के कारण लाभ व बिगड़े कामों में सुधार रहेगा।

- पारिवारिक वातावरण में कुछ कटुताएँ कम होंगी, परन्तु लोगों के सहयोग से विशेष उन्नति हुए कार्य पूर्ण होंगे।

- व्यवसाय में उन्नति के अवसर मिलेंगे, परन्तु स्वास्थ्य कटु रहेगा।


धनु राशि (Sagittarius) — (ये, यो, भा, भी, भू, धा, फ, ढे)


- गुरु एवं शनि की दृष्टियाँ होने से शुभ-अशुभ (मिश्रित) प्रभाव रहेंगे।

- पूर्ववर्ती बन्धुओं से धन-लाभ तथा सुख-साधनों में वृद्धि होगी, धर्म-कर्म में रुचि भी रहेगी।

- परन्तु असमंजस और झंझट के कारण गृहस्थ उलझनें व परेशानियाँ होंगी।


मकर राशि (Capricorn) — (भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी)


- मानसिकता से ही स्थिति शिथिल रहेगी। मृत्यु तुल्य कष्ट की संभावना रहेगी 

- ता. 16 से मातापक्ष की दृष्टि तथा स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान रखें।

- अनावश्यक खर्च व धन-लाभ में विघ्न की सम्भावना होगी।

- आम बुद्धि के साथ-साथ कई नई सम्भावनाएँ भी बनेंगी।


कुम्भ राशि (Aquarius) — (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सौ, दा)


- निकट सहयोगियों से कपटपूर्ण धोखा मिले।

- शुभ कार्यों में प्रवृत्ति रहेगी, परन्तु क्रोध व उत्तेजना का भय तथा वाद-विवाद-झगड़े के संकेत हैं।

- धन सम्बन्धी विशेष चिन्ता रहेगी; लक्ष्मी-श्रीसूक्त का पाठ लाभदायक।


मीन राशि (Pisces) — (दि, दु, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)


- गुरु की दृष्टि के कारण धार्मिक एवं शुभ योग, पर खर्च अधिक रहेगा।

- मास के प्रारम्भ में तेजी एवं व्यर्थ की दौड़-धूप अधिक रहेगी।




इस बर्ष में कैसी रहेगी वारिश फल तथा व्यापार कैसा रहेगा राजा गुरु तथा मंत्री मंगल का फल

   इस बार ‘रौद्र’ नामक संवत्सर रहेगा।जब भी कोई बर्ष में शुभ कार्य होगा रौद्र नामक संवत्सर का प्रयोग किया जाएगा इस सम्बतसर का प्रयोग होगा। इस...