21अक्तुबर 2025 शुभ संवत् 2082 दीपावली आश्विन (5) ५ गते मंगलवार को जबकी 19 तारीक रविवार ३ (3) गते हनुमान जयन्ती धनत्रयोदशी को नवीन बर्तन का क्रय सांय काल में लक्ष्मी नारायण का पूजन करने के बाद अनाज वस्त्र खुशियों एवं उनके यमार्थ निमित्त दीपदान करें इससे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता।
इस साल21 अक्तुबर को दिवाली मनाने का कारण है की 21 अक्टूबर को अमावस्या सूर्य को स्पर्श कर रही है जब तक सूर्य को तिथि सपर्श नहीं करती तब तक वो तिथि नहीं मानी जाती । इसलिए 21 तारीख़ को शाम तक अमावस्या है और 21 तारीख़ को ही शास्त्र सम्मत सभी पंचांगो ओर विद्वानो ने इसे अमावस्या को दीपावली के पर्व के रूप में माना है । भ्रम में न पड़े ।
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, तिथियाँ सूर्योदय से पहले या बाद में शुरू हो सकती हैं, और इस साल अमावस्या तिथि का समय 21 अक्तुवर (५) गते मंगलवार को दीवाली मनाने के लिए उपयुक्त माना जा रहा है।
20 अक्नतुबर 2025 मास ४ (4) गते कार्तिक नरक चतुर्दशी के दिन बिजली , अग्नि, उल्का आदि से मृतकों की शांन्ति के लिए चार मुख वाले दीपक को प्रज्वलित करके यथा शक्ति दान करे। सांय काल को दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल,तिल और कुश लेकर तर्पण करें।इस दिन की अर्धरात्रि के समय घृत पूर्ण दीपक जलाकर 19 अक्तुबर को श्री हनुमान जयन्ति मनाई जाती है।
उन्हें मोदक के लिए फल आदि अर्पण करें एवं सुंदरकांड आदि हनुमान स्तोत्र का पाठ करें । 21 अक्तुबर 2025 कार्तिक 5(५) गते मंगलवार को कार्तिक मास अमावस्या दीपावली को प्रदा प्रदोष काल में दीपदान करके अपने गृह के पूजा स्थान में मंत्र पूर्वक दीप प्रज्वलित करके श्री महालक्ष्मी की यथा विधि पूजा करनी चाहिए।
पूजन का समय
लक्ष्मी पूजा मंगलवार, 21 अक्तुवर ,2025 पर (5) ५ गते कार्तिक
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त - 03:27 पी एम से 05:54 पी एम
अवधि - 01 घण्टा 55 मिनट्स
प्रदोष काल - 05: 27 पी एम से 08:09पी एम
वृषभ काल - 07:08 पी एम से 09:05 पी एम
ब्रह्म पुराण अनुसार कार्तिक मास की अमावस्या को अर्धरात्रि के समय लक्ष्मी महारानी सभी लोगों के घर में जहां-तहां वितरण करती हैं इसलिए अपने घर को सब प्रकार से स्वच्छ शुद्ध और सुशोभित करके दीपावली तथा दीप मालिका मनाने से लक्ष्मी जी प्रसन्न होते हैं तथा वहां स्थाई रूप से निवास करती है कि अमावस्या प्रदोष काल एवं आज रात्रि व्यापिनी हो तो विशेष विशेष शुभ होती है।
दीपावली के दिन क्या करे ?
इस दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर दैनिक कृतियों से निवृत हो मित्र गण तथा देवताओं का पूजन करना चाहिए ! संभव हो तो दूध दही और खेत से पितरों का पावन याद करना चाहिए ! यदि यह संभव हो तो दिनभर उपवास कर गोधूलि बेला में अथवा वृष सिंह वृश्चिक और स्थिर लग्न में श्री गणेश कलश षोडश मातृका ग्रह पूजन पूर्वक भगवती लक्ष्मी का षोडशोपचार पूजन करना चाहिए ! इसके अंदर महाकाली का तथा मां सरस्वती का कलम वही आदि के रूप में कुबेर का तुला के रूप में सभी जी पूजन करें ना चाहिए । इसी समय दीप पूजन कर यमराज तथा मित्र गणों के निमित्त सत्संग क्लब दीप दान करना चाहिए तदुपरांत यथो लब्ध निशीथ आदि शिव मूर्तियों में मंत्र जप यंत्र सिद्धि आदि अनुष्ठान संपादित करने चाहिए दीपावली वास्तव में पांच पर्वों का मौसम माना जाता है जिसकी व्याप्ति कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी धनत्रयोदशी होगी ।
इस वार विशेष क्या है ?
इस वार मंगलवार 21अक्तुवर कार्तिक (५) 5 गते को भी अमवस्या रहेगी । अतः22 तारिक अक्तुवर बुधवार 2025 कार्तिक६ (6) गते पडवा अन्नकूट गोवर्धन पूजा होगी । वीरवार 23 अक्तुवर 2025 कार्तिक ७(7) गते द्वितीया भैया दूज पर्व मनाया जाएगा ।
दीपावली के पर्व पर धन की प्रभुत प्राप्ति के लिए धनदा की अधिष्ठात्री भगवती लक्ष्मी का समारोह पूर्वक आभार षोडशोपचार सहित पूजा की जाती है आगे दिए निर्देश शुभ कार्यों में किसी स्वच्छ एवं पवित्र स्थान पर आटा हल्दी अक्षत पुष्प आदि से अष्टदल कमल बनाकर श्री लक्ष्मी का आवाहन स्थापना करके देवों की विधिवत पूजा-अर्चना करनी चाहिए।
इसमें श्री गणेश लक्ष्मी पूजन प्रारंभ कर लेना चाहिए दीपदान महालक्ष्मी पूजन कुबेर बहीखाता पूजन करके घर एवं मंदिरों में दीपजलाने चाहिए। आश्रितों को भोजन मिष्ठान आदि बांटना चाहिए।
निशिता काल मुहूर्त
08 :09 मि0 पी एम से 08 :51पी एम निशीथ काल में 8:52से पहले पूजन हो जाना चाहिए।
इस समय श्री सूक्त कनकधारा स्त्रोत लक्ष्मी स्त्रोत का पाठ करना चाहिए
महानिशिथा काल मुहूर्त
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त -
15:55 से17:55 पी एम, अक्तुवर 21 मंगलवार
श्री महा लक्ष्मी पूजन
पूर्वत्रैव व्याप्तिरिति पक्षे पात्र यामात्रयाधिकव्यापिदर्शे दर्शनपेक्षया प्रतिपन्नभरामसत्वे लक्ष्मीपूजादिकमपि पितृवेत्युक्तम्। एतन्मते उभयत्र प्रदोषव्याप्ति-पक्षपि पात्र दर्शस्य सार्ध्यमात्रयाधिक-व्याप्ति-त्वात्परैव युक्तेति भाति। (पुरुषार्थ-चिन्तामणि)
'यं तिथिं समनुप्राप्य उदयं याति भास्करः।
सा तिथि सकला ज्ञेया स्नान-दान-व्रतादिषु।।'
शास्त्रवचनानुसार इसी दिन (21 अक्तूबर, 2025)
दीपावली के दिन गृह में प्रदोष काल से महालक्ष्मी पूजन प्रारंभ करके अर्धरात्रि तक जप अनुष्ठान आदि का विशेष महत्व में होता है । प्रदोष काल से कुछ समय पूर्व स्नान आदि उपरांत धर्म स्थल पर मंत्र पूर्वक दीपदान करके अपने निवास स्थान पर श्री गणेश सहित महालक्ष्मी कुबेर पूजा आदि करके अल्पाहार करना चाहिए। तदुपरांत निशिथा आदि मुहूर्तों में मंत्र जप यंत्र सिद्धि आदि अनुष्ठान संपादित करने चाहिए।
दीपावली वास्तव में पांच पर्वों का महत्व माना जाता है। जिसकी व्याप्ति कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी धनतेरस से लेकर कार्तिक शुक्ल द्वितीया भाई दूज तक रहती है। दीपावली के पर्व पर धन की प्राप्ति के लिए धन की अधिष्ठात्री धनदा भगवती लक्ष्मी की समारोह पूर्वक आवाहन षोडशोपचार सहित पूजा की जाती है ।आगे दिए गए निर्दिष्ट शुभ कालो में किसी स्वस्थ एवं पवित्र स्थान पर आटा, हल्दी, अक्षत, पुष्प आदि से अष्टदल कमल बनाकर महालक्ष्मी का आवाहन स्थापना करनी चाहिए देवों का विधिवत पूजा अर्चना करनी चाहिए।
आवाहन मंत्र है -
कां सोस्मितां हिरणयप्रकारामाद्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम्। पद्मेस्थितां पद्मवर्णां तामिहोप ह्वये श्रियम्।
पूजा मंत्र है
ॐ गं गणपतये नमः । लक्ष्म्यै नम:।नमस्ते सर्व देवानां वरदासि हरे: प्रिया। या गतिस्त्वत्प्रपन्नानां सा में भूयात्वदर्चनात।। श्री लक्ष्मी की
' एरावतसमारुढो म बज्रहस्तो महाबल:।शत यज्ञाधिपो देवस्तस्मा इंद्राय नमः ।
इस मंत्र से इनकी कुबेर की निम्नलिखित मंत्र से पूजा करें
कुबेराय नमः, धनदाय नमस्तुभ्यं निधि पद्माधिपाय च। भवंतु त्वत्प्रसादान्मे धनधान्यादि सम्पद: ।
पूजनौ सामग्री में विभिन्न प्रकार की मिठाई फल ,पुष्प ,अक्षत, धूप, दीप आदि सुगंधित वस्तु में सम्मिलित करनी चाहिए। दीपावली पूजन में प्रदोष निश्चित एवं महा निशित काल के अतिरिक्त चौघड़िया मुहूर्त भी पूजन बहीखाता, पूजन ,कुबेर पूजा ,जप आदि अनुष्ठान की दृष्टि से विशेष प्रशस्त एवं शुभ माने जाते है।
अक्षयै नवमी 31 अक्तुवर 2025 शुक्रवार १५(15) गते कार्तिक को किया हुआ पूजा पाठ दिया हुआ दान अक्षय हो जाता है
इसी प्रकार हरि प्रबोधिनी एकादशी 2 नवंबर 2025 रविवार १७ गते कार्तिक लक्ष्मी नारायण की पूजा की जाती है।



नमो नमः
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ReplyDeleteTq sir
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ReplyDeleteJay shree Krishna
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